Mother Self Care in Hindi | Emotional Blog
🧡 माँ होते हुए भी — अपना अस्तित्व सँभाल कर रखना
कभी-कभी दिन ऐसे बीत जाता है
जैसे घड़ी नहीं चल रही,
बल्कि तुम ही धीरे-धीरे खर्च हो रही हो…
बच्चों की खिलखिलाहट में,
रसोई की भाप और खुशबू में,
कपड़ों की तहों के बीच,
और जिम्मेदारियों की अंतहीन सूची में।
जब शाम उतरती है,
तो मन के किसी शांत कोने से
एक धीमा-सा सवाल उठता है—
“और मैं… मेरा हिस्सा कहाँ है?” 🌙
🖤
🌬 खुद को खो देना इतना सहज क्यों लगने लगता है?
क्योंकि माँ बनते ही
देना सिर्फ़ आदत नहीं रहता,
वो स्वभाव बन जाता है।
और धीरे-धीरे
अपनी ज़रूरतें
सूची के आख़िरी पन्ने पर चली जाती हैं।
हम अक्सर कह देते हैं—
“अभी तो बस एक चरण है…”
पर जब ये “चरण”
बहुत लंबा खिंच जाता है,
तो भीतर की स्त्री
धीरे-धीरे
अपनी ही आवाज़
पहचानना भूलने लगती है… 🍂
🩵
✨ खुद से जुड़े रहने के कुछ कोमल तरीके
🪷 दिन में एक छोटा-सा पल तय करो
जिस पर किसी और का अधिकार न हो—
वो समय
सिर्फ़ तुम्हारे लिए हो।
🌸 अपनी भावनाओं को
चुप कराने की बजाय
उन्हें पहचान दो, नाम दो—
क्योंकि जिस एहसास को नाम मिल जाता है,
वो भारीपन नहीं रहता।
🤍 सहारा माँगना
कमज़ोरी नहीं है…
ये इस बात का संकेत है
कि तुम टूटने से पहले
खुद को संभालना जानती हो।
🌿 और हमेशा याद रखो—
तुम सिर्फ़ “माँ” नहीं हो,
तुम एक संपूर्ण व्यक्तित्व हो…
जिसकी साँसों, सपनों
और सुकून का भी
अपना अधिकार है।
🤎
🌼 एक छोटी-सी याद
जब माँ
अपने अस्तित्व को नहीं भूलती,
तो बच्चा भी
उसकी आँखों में
पूरा आकाश देखता है…
और माँ के भीतर
जो स्त्री जीवित रहती है,
वही बच्चे को
जीवन की खूबसूरती समझाती है। 🧡✨
