ऐसे रिश्ते जो आत्मसम्मान को चुपचाप घायल कर देते हैं
कुछ रिश्ते—जो भीतर की रोशनी धीरे-धीरे कम कर देते हैं
कुछ लोग ऐसे होते हैं
जो पास बैठकर भी
मन को अकेला कर देते हैं।
उनसे बात करके थकान नहीं होती…
थकान होती है
उस अनदेखे बोझ से
जो उनकी बातों में छिपा होता है। 🌫️
वो हँसते-हँसते
ऐसे तीर छोड़ते हैं
जो मज़ाक नहीं,
आत्मसम्मान का नुकसान बन जाते हैं। 🥀
वो पूछते नहीं—
तुम ठीक हो?
वो बस तय कर देते हैं—
तुम्हें क्या होना चाहिए,
तुम्हें क्या करना चाहिए,
तुम्हें कैसे जीना चाहिए। ⚖️
और फिर धीरे-धीरे
तुम्हारा मन
जीने से ज़्यादा
खुद को साबित करने में
खर्च होने लगता है… 😮💨
🌿 ऐसे रिश्तों की पहचान
• जहां बात के बाद सुकून नहीं, भारीपन मिले
• जहां सम्मान कम और तंज़ ज़्यादा हो
• जहां तुम्हारी अच्छाई भी कम पड़ती रहे
• जहां तुम्हें हर बार खुद को समझाना पड़े
🛡 खुद को बचाने के शांत तरीके
• कम शब्द, साफ़ दूरी
• हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं
• अपनी सीमाओं को गुनाह मत समझो
• शरीर के संकेत सुनो—
जहां मन घुटे, वहां रुक जाना ही समझदारी है। 🫀
याद रखना—
दूर हो जाना
बदतमीज़ी नहीं होता,
कभी-कभी
वो अपने भीतर की
इज़्ज़त बचाने का निर्णय होता है। 🪷✨
क्योंकि
तुम्हारा मन
कोई कूड़ादान नहीं
कि हर कोई
अपनी नकारात्मकता
उसी में फेंकता रहे। 🌙🤍
